तत्कालीन अपर कलेक्टर बेड़ेकर, तहसीलदार व खजराना टीआइ पर लोकायुक्त में केस दर्ज !

विवादित त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था के पदाधिकारियों पर फर्जी कार्रवाई करने का आरोप।
अफसरों पर त्रिशला संस्था के पदाधिकारियों की गलत रिपोर्ट बनाने और 15 एकड़ जमीन को विवादित बताने का आरोप है।
तत्कालीन अपर कलेक्टर, नायाब तहसीलदार, खजराना टीआइ, एएसआइ, सहकारिता निरीक्षक पर दर्ज हुआ केस।
लोकायुक्त पुलिस इंदौर ने करवाई थी मामले की जांच। जांच में आरोप सही पाए जाने पर अफसरों पर दर्ज हुई एफआइआर।
इंदौर। इंदौर के तत्कालीन अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर सहित पांच अफसरों पर भ्रष्टाचार एवं पद का दुरुपयोग करने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने एफआइआर दर्ज की है।अफसरों पर त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था के पदाधिकारियों की गलत रिपोर्ट बनाने और 15 एकड़ जमीन को विवादित बताने का आरोप है।
एसपी (लोकायुक्त) एसएस सर्राफ के मुताबिक, नंदानगर निवासी ईश्वर अग्रवाल ने तत्कालीन अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर, नायब तहसीलदार रितेश जोशी, खजराना थाना के तत्कालीन टीआइ दिनेश वर्मा, एएसआइ एनएस बोरकर, सहकारिता निरीक्षक प्रवीण जैन के विरुद्ध सीधे लोकायुक्त को शिकायत भेजी थी

दर्ज हुआ था धोखाधड़ी का प्रकरण:-

ईश्वर ने कथनों में बताया कि वर्ष 2021 में संस्था के विरुद्ध खजराना थाना में धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया था। अफसरों ने रिपोर्ट में दावा किया कि संस्था की खजराना क्षेत्र स्थित आवासीय प्रयोजन की 15 एकड़ जमीन को न्याय विभाग कर्मचारी गृह निर्माण संस्था द्वारा पूर्व में ही खरीदा जा चुका था, जबकि निरीक्षक (सहकारिता) प्रवीण जैन उस वक्त न्याय विभाग संस्था के प्रशासक थे। बेड़ेकर द्वारा रिपोर्ट भेजी और नायब तहसीलदार को थाने भेजकर एफआइआर दर्ज करवाई।

एफआइआर में तथ्यों को छुपाने का आरोप:-

संस्था के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एफआइआर तथ्यों को छुपाकर दर्ज की गई है। जिस जमीन को न्याय विभाग संस्था की बताया, उसका तो त्रिशला गृह निर्माण संस्था द्वारा रजिस्टर्ड विक्रय पत्र द्वारा खरीदकर तहसीलदार न्यायालय से नामांतरण करवा लिया गया था। अफसरों द्वारा दर्ज करवाई गई एफआइआर फर्जी बताई और दावा किया कि वर्ष 2017 में भी एक एफआइआर दर्ज हुई थी। इसे कोर्ट ने खारीज करते हुए टिप्पणी की कि प्रकरण सिविल प्रकृति का है।

लोकायुक्त ने करवाई थी मामले की जांच:-

लोकायुक्त द्वारा मामले की जांच करवाई गई तो यह तथ्य भी सामने आया कि न्याय विभाग संस्था द्वारा गैर रजिस्टर्ड एवं बगैर स्टांप ड्यूटी के इकरारनामा के आधार पर जमीन खरीदने का दावा किया है। जांच में जमीन शासकीय और सीलिंग की नहीं पाई गई। लोकायुक्त ने सिविल प्रकरण की एफआइआर दर्ज की और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी अनदेखा किया।

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