कलयुग के न्यायाधीश हैं शनि देव लॉकडाउन के बीच मनाई गई शनि जयंती

ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम,छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम 
 खंडवा। शनिदेव का नाम आते ही अक्सर लोग सहम जाते हैं या फिर असहज हो जाते हैं। उनके प्रकोप से खौफ खाने लगते हैं। शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं। शनि देव न्याय के देवता हैं, उन्हें दण्डाधिकारी और कलियुग का न्यायाधीश कहा गया है। शनि शत्रु नहीं बल्कि संसार के सभी जीवों को उनके कर्मों का फल प्रदान करते हैं। वह अच्छे का अच्छा और बुरे का बुरा परिणाम देने वाले ग्रह हैं ।

शनिदेव पीड़ा और संकट हरने वाले भगवान है जो भी श्रध्दालु इनकी शरण में जाता है उसकी मनोकामना पूरी होती है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ अमावस्या पर शनि देव का जन्म हुआ था। इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। शुक्रवार को लॉकडाउन के बीच प्राचीन शनि मंदिर में शनि जयंती सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए मनाई गई। मंदिर में भगवान की प्रतिमा का अभिषेक करने के बाद 12 बजे जन्म आरती की गई। इसके साथ ही प्रतिमा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। मंदिर के पुजारी विशाल नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि इस दिन शनिदेव की पूजा-अर्चना कर उनको प्रसन्न किया जाता है। अगर कोई शनिदेव के कोप का शिकार है तो रूठे हुए शनिदेव को मनाया भी जा सकता है।  ज्येष्ठ मास में अमावस्या को धर्म कर्म, स्नान-दान आदि के लिहाज से यह बहुत ही शुभ व सौभाग्यशाली माना जाता है।

शनि दोष से बचने के लिये इस दिन शनिदोष निवारण के उपाय कर सकते हैं। वही शनि जयंती के अवसर पर शनि मंदिर परिवार व शनि मंदिर पहुंचे श्रध्दालुओ ने भगवान के दर्शन एवं तेल चढ़ाकर यही कामना की भगवान कोरोना का जो संकट इन दिनों देश और दुनिया में आया है इसमें किसी की भी मृत्यु न हो और यह बीमारी जल्द से जल्द हम से दूर हो। 

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