लंबी छुट्टी के बाद न्यायालयों में शुरू हुआ नियमित कामकाज

लंबी छुट्टियों के बाद बुधवार से न्यायालयों में नियमित कामकाज शुरू हुआ। जिला न्यायालय और हाई कोर्ट में सामान्य दिनों की तरह वकीलों और पक्षकारों की चहल-पहल नजर आई। हालांकि सामान्य दिनों के मुकाबले कम ही प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए थे। ज्यादातर मामलों में सुनवाई आगे बढ़वा ली गई। आने वाले दिनों में त्योहारों के चलते एक बार फिर लंबी छुट्टियां लगना हैं। इसके चलते कई वकील शहर से बाहर चले गए हैं। लगातार अवकाश की वजह से न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ रही है। इसे देखते हुए वकील अब अवकाश कम करने की मांग भी उठाने लगे हैं।

महामारी की वजह से न्यायालय लंबे समय तक बंद रहे हैं। इसके चलते लंबित मामलों की संख्या बढ़ रही है। 1 नवंबर से न्यायालयों में दीपावली अवकाश शुरू हो रहा है जो एक सप्ताह तक रहेगा। इसके बाद दिसंबर में भी लंबी छुट्टियां हैं। एडवोकेट संजय मेहरा के मुताबिक इसके पहले भी कई बार न्यायालयों के अवकाश कम करने की मांग उठती रही है, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हो सका। एडवोकेट मनोज बिनीवाले के मुताबिक एक दिन छुट्टी की वजह से दस हजार से ज्यादा मामलों की सुनवाई अटकती है। अवकाश कम किए जाने चाहिए ताकि प्रकरणों की नियमित सुनवाई हो सके। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारी भी न्यायालयों में अवकाश की संख्या कम करने की मांग करते हुए पत्र लिख चुके हैं।

नगर निगम नहीं बता सका शहर में क्यों फैली थी बदबू 

करीब दो साल पहले शहर के वातावरण में अचानक फैली बदबू को लेकर हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में बुधवार को सुनवाई हुई। नगर निगम को बताना था कि ऐसा क्या हुआ था कि लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो गया था और फिलहाल बदबू की स्थिति क्या है। लेकिन निगम के वकील ने जवाब देने के लिए समय ले लिया। अब मामले में दीपावली अवकाश के बाद सुनवाई करेगी। यह जनहित याचिका अरविंद भगोरे ने एडवोकेट विशाल सनोटिया के माध्यम से दायर की है। इसमें मांग की गई है कि विशेष जांच दल गठित कर पता लगाया जाना चाहिए कि किस वजह से बदबू फैली थी। साथ ही प्रदूषण विभाग, नगर निगम और अन्य जिम्मेदार विभागों से इस बात का रिकार्ड भी बुलवाया जाए कि उन्होंने बदबू को लेकर क्या कार्रवाई की थी।

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